How to concentrate on studies

#1.क्रिकेट का खेल देखना अथवा खेलना , पढ़ाई में सबसे बड़ा व्यवधान है । इसलिए खेल में समय ज्यादा देना होता है । इसे टी.वी. पर देखने तथा खेलने में समय की बहुत बरबादी होती है और लाभ कुछ भी नहीं मिलता है । प्रत्येक दिन खेलने से पढ़ने के लिए समय नहीं मिल पाता । उसे खेलने में उचित मात्रा में व्यायाम नहीं हो पाता । यह खेल मँहगा है ।

अतः विद्यार्थियों को इस खेल से तौबा कर लेनी चाहिए ।जैसे- फुटबॉल , बॉलीबॉल , हॉकी , कबड्डी , बास्केट बॉल , टेबिल टेनिस , हैंडबॉल , बैडमिंटन जैसे खेल मात्र एक घंटे में : बहुत अच्छा व्यायाम , मनोरंजन और जीवट प्रदान करते हैं ।

इन्हीं कारणों से संसार के कई विकसित देश क्रिकेट से दूरी बनाए रखते हैं । क्रिकेट के खिलाड़ी पढ़ाई में प्राय : बहुत अच्छी उपलब्धियाँ प्राप्त नहीं कर पाते हैं ।

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# 2. टी.वी. देखना भी पढ़ाई में बड़ा व्यवधान है ।इसलिए मुख्य समाचार , ज्ञानवर्द्धक कार्यक्रम अथवा मनोरंजन का कार्यक्रम देखना उचित है । लेकिन अन्य कार्यक्रमों में समय बरबाद करना उचित नहीं है । इसलिए वीडियो गेम्स में समय बरबाद न करें । इंटरनेट पर जो कुछ देखें , अपने अभिभावकों की उपस्थिति में ही देखें ।

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# 3. मोबाईल फोन आपके लिए अध्ययन में बड़ा व्यवधान है । इसका प्रयोग अपने पास मोबाईल रखकर नहीं करना चाहिए । इसलिए अभिभावकों के फोन से आवश्यकता पड़ने पर ही बातें करें । गाने सुनने में अधिक समय बरबाद न करें । कुछ समय प्रेरणाप्रद मधुर संगीत स्वयं गुनगुनाते हुए गाएँ । 
 

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# 4. आपके लिए एक महत्त्वपूर्ण परामर्श यह है कि लड़के लड़कों से मित्रता करें , लड़कियाँ लड़कियों से मित्रता करें , यह उचित है । परन्तु लड़के और लड़कियों की आपसी मित्रता , घनिष्ठता , मोबाईल पर लंबी बातें करना कदापि उचित नहीं है । इन संबंधों में थोड़ी दूरी बनाकर रखना ही उचित है ।

लड़के और लड़कियों में भाई – बहिन का रिश्ता हो सकता है। मित्रता का रिश्ता समाज में आलोचना , उपहास , संबंधों में गंदगी , अभिभावकों और स्वयं बच्चों के लिए शर्मिंदगी का कारण बन जाता है , इससे बचना ही उचित है । इन संबंधों के बनने से पढ़ाई में ही व्यवधान पड़ता है । 

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# 5. शारीरिक और मानसिक अस्वस्थता पढ़ाई में बहुत बड़ा व्यवधान है । शरीर को स्वस्थ , बलिष्ठ , बनाने के लिए स्वास्थ्य के नियमों का पालन अवश्य करें ।

जब शरीर अस्वस्थ रहेगा , बार – बार सिरदरद , जुकाम , बुखार आदि रोग परेशान करेंगे तो पढ़ाई में व्यवधान पड़ेगा । ऐसी स्थिति में विद्यालय भी छूटेगा । आहार विहार , आचार – विचार को नियंत्रित कर स्वस्थ रहना कठिन कार्य नहीं है । प्रकृति के विरुद्ध जाने से रोग होते हैं । प्राकृतिक जीवन का अभ्यास करने से स्वस्थ रहा जा सकता है । इसलिए स्वस्थ रहने के लिए उचित व्यायाम बहुत आवश्यक हैं ।

“अच्छी पुस्तकें जीवंत देव प्रतिमाएँ हैं , जिनकी आराधना से हमें तत्काल प्रकाश और उल्लास मिलता है”

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