Home » Think and grow rich

Think and grow rich

Think and grow rich

आपके जो भी मांगे या जरूरते हैं उसे अपने दिमाग में बनाए रखें। थिंक एंड ग्रो रिच से किसी न किसी दिन आपकी  यह मांगे सुबकॉन्सियस माइंड के द्वारा पूरा अवश्य किया जायेगा। जब आपकी मांगे सुबकॉन्सियस माइंड तक पहुचेगी सभी जरूरते अपने आप पूरी होती जाएगी।

Think and grow rich

  # 1. अपनी मांग स्पष्ट होनी चाहिए : यदि आपकी माँग स्पष्ट नहीं है तो प्रकृति की शक्तियाँ आपकी वह माँग पूरी नहीं कर पाएँगी । यदि आपकी माँग आधी अधूरी और अस्पष्ट हुई तो परिणाम भी मिलेजुले होंगे ।

सबसे पहले आप स्पष्ट निश्चय कीजिए कि वास्तव में आप पाना क्या चाहते हैं । यह विश्वास रखिए कि आप जो चाहेंगे , वह मिलेगा । आप कुछ भी बन सकते हैं , कुछ भी कर सकते हैं । यदि आपकी माँग स्पष्ट है और आप लक्ष्य के प्रति दृढ़ हैं तो समझिए सफलता का पहला सोपान चढ़ लिया ।

थिंक एंड ग्रो रिच

# 2. विश्वास रखिए आपकी माँग पूरी होगी : आपका विश्वास मन का प्रमुख रसायन शास्त्री है । जब विचार किसी वस्तु पर केंद्रित होते हैं तो उत्पन्न कॉस्मिक तरंगें आपके लक्ष्य प्राप्ति में सहायक होंगी । यदि आप सफलता में संदेह रखेंगे , भय बना रहेगा तो लक्ष्य आपसे दूर होता जाएगा ।

आप विश्वास करें कि अपना विश्वास पाकर ही रहेंगे तो आकर्षण का सिद्धांत आपको लक्ष्य प्राप्त करने में सहायता करेगा । यदि आपको यह दृढ़ विश्वास है कि आपकी सफलता अवश्य संभव है तो वह सचमुच संभव हो जाएगी । आप जब भी जो कुछ पाना चाहते हैं , उसी समय यह विश्वास भी कर लीजिए कि वह वस्तु आपको जरूर मिल जाएगी ।

कितना भी समय लगे लेकिन संकल्प पूरा होगा ही , यह विश्वास रखिए । किसी समय अमेरिका के सबसे अमीर सैम विल्सन ने कहा था – मैं जीतने की उम्मीद रखता हूँ , हमेशा यह सोच कर कि मैं विजयी रहूँगा ।मुझे कभी यह नहीं लगा कि मैं हार सकता हूँ । मैंने हमेशा यही सोचा कि मुझे जीतना ही है । ऐसा सोचना ही पूरी होने वाली भविष्यवाणी है । विश्वास एक बहुत शक्तिशाली मंत्र है । चिकित्सा शास्त्र में चिकित्सक अपनी नकली दवा पर विश्वास जमाकर मरीज को राहत महसूस करा देते हैं । इसे प्लेसेबो इफेक्ट कहते हैं । दृढ़ इच्छा शक्ति से अपने लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है ।

यदि आपको लक्ष्य की प्राप्ति में शंका है तो इसका मतलब यह है कि आपका लक्ष्य आंतरिक भावना पर आधारित नहीं है । यदि आपको जोश और उत्साह का अनुभव हो तो समझें कि आप लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सही दिशा में जा रहे हैं । लक्ष्य प्राप्ति की सफलता में विश्वास पैदा करने के लिए प्रारंभ में छोटे अभ्यास करने चाहिए । छोटे लक्ष्यों की प्राप्ति से विश्वास बढ़ता जाएगा । आपका विश्वास तंत्र भी बढ़ता जाएगा । आगे आप बड़े लक्ष्यों की सफलता पर विश्वास कर सकेंगे ।

Think and grow rich

# 3. मान लीजिए आपका लक्ष्य प्राप्त हो गया : आपका जो भी लक्ष्य हो , कल्पना में मान लीजिए कि वह पूरा हो गया है और उस लक्ष्य की प्राप्ति पर आपको जो आनंद मिलना चाहिए था , वह मिल रहा है । कल्पना स्पष्ट और सुखद होनी चाहिए , तभी परिणाम अधिक अच्छे होंगे ।

अवचेतन मन शब्दों की नहीं चित्रों की भाषा समझता है । आपकी सोच और भावनाएँ जितनी मजबूत होंगी उतनी ही शक्ति से आकर्षण का सिद्धांत काम करेगा और कल्पना को सत्य में बदल पाएँगे । लक्ष्य प्राप्ति की कल्पना करने से चेहरा खिल उठेगा और भावनाएँ सकारात्मक हो जाएँगी , इससे लक्ष्य प्राप्त करने की प्रक्रिया तेज और आसान हो जाएगी ।

Think and grow rich

# 4 . अवचेतन मन की शक्ति का प्रयोग करें : चेतन मन में 10 प्रतिशत शक्ति है , शेष 90 प्रतिशत शक्ति अवचेतन मन में होती है । चेतन मन में सोचने और निर्णय लेने की क्षमता होती है । अपने विचारों को नियंत्रित करने , स्वयं को बार – बार सुझाव देकर और बार – बार एक ही बात को दोहराते रहने से बात अवचेतन में बैठ जाती है और सत्य में बदल जाती है ।

जाग्रत अवस्था में चेतन मन सक्रिय और अवचेतन निष्क्रिय रहता है । नींद में अवचेतन मन सक्रिय और चेतन निष्क्रिय हो जाता है । इन दोनों अवस्थाओं के मध्य एक अल्फा अवस्था होती है जिसमें दोनों सक्रिय होते हैं । उस समय चेतन मन अवचेतन को संदेश देता है । अवचेतन उसे मानने लगता है और आदेश का पालन करने लगता है । आप अल्फा अवस्था में अवचेतन मन को जो संदेश देते हैं , वह अवश्य पूरे होते हैं । आप जो चाहते हैं वैसा ही संदेश अल्फा अवस्था में अवचेतन मन को देने का अभ्यास करें ।

Think and grow rich

रात्रि में सोने से पहले , सुबह जगने के बाद हम अल्फा अवस्था में प्राकृतिक रूप से होते हैं । अभ्यास करके भी अल्फा अवस्था प्राप्त कर सकते हैं । शांत होकर बैठें । आँखें बंद करके दोनों भौंहों के मध्य स्थित आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाएँ । कुछ मिनटों में ही आप अल्फा अवस्था में होंगे ।

अब आप जो पाने चाहते हैं उसे पूरा होते हुए अनुभव करें और संकल्प को गहराई से मन ही मन दोहराएँ । यह भी बोलें कि आप लक्ष्य कब तक पा लेंगे और उसके लिए क्या प्रयास करेंगे । इस प्रक्रिया को दिन में एक दो बार दोहरा लें । अवचेतन केवल उन्हीं आदेशों का पालन करता है जिनमें भावना जुड़ी होती हैं ।

 

2 thoughts on “Think and grow rich”

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *