#1. प्राणायाम आपके लिए अनिवार्य है । सुखपूर्वक पालथी मारकर बैठे , कमर सीधी , दोनों हाथों के अंगूठे और तर्जनी छुई रहे । शेष तीन अंगुलियाँ सीधी , हथेली ऊपर की ओर रहे , दोनों हाथ घुटनों पर रखें । आँखें बंद रखें , यह ज्ञानमुद्रा है । ज्ञानमुद्रा आपके लिए बहुत उपयोगी है । इस मुद्रा में बैठने से मन शीघ्र ही एकाग्र होने लगता है । इसी मुद्रा में बैठकर निम्नलिखित Yoga for health प्राणायाम करने चाहिए ।

Yoga for health

( अ ) कपालभाति : कपालभाति में पेट को अंदर सिकोड़ते हुए साँस को झटके से बाहर निकालें । साँस लेने का प्रयास न करें । स्वतः थोड़ा श्वाँस अंदर आता है , उसे आने दें । पुनः श्वाँस झटके से बाहर निकालें और पेट को अंदर सिकोड़ें । प्रति सेकेंड एक बार की गति से 15 मिनट कर सकते हैं ।

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(ब ) अनुलोम – विलोम : अनुलोम – विलोम के लिए दाहिने हाथ के अंगूठे और अनामिका से नाक पकड़ें । बाएँ स्वर से श्वाँस अंदर लें , दाहिने स्वर से निकाल दें । पुनः दाहिने से अंदर लें बाएँ से निकाल दें । ऐसा 15 मिनट कर सकते हैं ।

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( स ) भस्त्रिका : यह प्राणायाम आपके लिए सबसे अधिक उपयोगी है । भस्त्रिका प्राणायाम में ज्ञानमुद्रा में बैठकर कंधे ऊपर उठाते हुए गहरी श्वाँस भरें तथा कंधे नीचे करते हुए श्वाँस तेजी से निकालें । यह क्रिया तेज गति से पहले थोड़ी देर करें और रुकें । फिर दोबारा प्रारंभ करें और जब तक किया जा सके तब तक करें । इस प्राणायाम को करने से मस्तिष्क शांत , तनाव रहित और ग्रहणशील बनता है । मन में प्रसन्नता बनी रहती है और अधिक कार्य करने की , अधिक समय तक पढ़ने की क्षमता प्राप्त होती है ।

( द ) भ्रामरी : भस्त्रिका की ही भाँति यह प्राणायाम भी आपके लिए इतना ही उपयोगी है । इसमें ज्ञानमुद्रा में बैठकर गहरी श्वाँस भरें और धीरे – धीरे भौरे जैसा गुंजार करते हुए श्वाँस बाहर निकालें । यह प्राणायाम पाँच बार करें । प्राणायाम का अभ्यास किसी योग शिक्षक से सीख लें तो अच्छा रहेगा । 

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#2. ध्यान आपके लिए अत्यंत उपयोगी है , शांत होकर ज्ञानमुद्रा में बैठें । आँखें बंद रखें । दोनों भौंहों के मध्य स्थित आज्ञाचक्र का ध्यान करें । आज्ञाचक्र में श्वेत प्रकाश का ध्यान करें । कुछ दिनों में ध्यान में श्वेत प्रकाश का आभास स्पष्ट होने लगेगा । आज्ञाचक्र का ध्यान आप की बुद्धि , स्मृति को बढ़ाने में अत्यंत उपयोगी है । आज्ञाचक्र के ध्यान के अतिरिक्त एकाग्रता की वृद्धि के लिए पिछले पृष्ठों में दिए गए प्रयोगों में त्राटक क्रिया का अभ्यास नियमित अवश्य करना चाहिए ।

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# 3. प्रात : 3-4 किलोमीटर दौड़ना अथवा तेज गति से टहलना युवाओं का अच्छा व्यायाम है । जितना समय हो सूर्य नमस्कार आसन यथाशक्ति करना चाहिए । डिनर जल्दी लें और 10 मिनट टहलें ।

# 4. दिन में कई बार कुछ देर गहरी साँस लें । इससे आराम मिलेगा और ऊर्जा मिलेगी।

#5. चिंता छोड़ें , चिंता से ऊर्जा का क्षरण होता है । प्यारा मधुर संगीत सुनें और गुनगुनाएँ , थकान दूर होगी , तरोताजा हो जाएँगे ।

# 6. मौन से आंतरिक ऊर्जा और शांति प्राप्त होती है । सुबह कुछ घंटे मौन रहें । दिनभर कम से कम बोलें । बोलने से बहुत ऊर्जा का हास होता है ।

#7. प्रतिदिन कम से कम 8-10 गिलास पानी बैठकर गिलास से घुट – घुट करके मुँह में थोड़ा रोककर पिएँ ।

# 8. नींद लाने के लिए ध्यान करें , नापसंद पुस्तकें पढ़ें , काले रंग का ध्यान करें , दूध पीएँ , चाय – कॉफी न पिएँ , अधिक प्रोटीन वाला भोजन न करें , सोने का समय न बदलें । बत्ती बुझा दें , आँखें बंद करें । ऐसा करने से शीघ्र ही नींद आ जाएगी ।

# 9. स्मरण शक्ति बढ़ाने के समस्त उपायों में वीर्य रक्षा सबसे महत्त्वपूर्ण है , क्योंकि ब्रह्मचर्य द्वारा ही मानसिक खुराक तैयार होती है । वीर्य ही स्मृति बनता है । ब्रह्मचर्य स्मरण शक्ति की नींव को सींचने के समान है ।

# 10. स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क रहता है , अस्वस्थ शरीर पढ़ाई में बड़ा व्यवधान है , अत : स्वास्थ्य के नियमों का पालन करें और शरीर बलिष्ठ और निरोग रखें ।

# 11. प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठे और शौचादि से निवृत्त होकर शुद्ध वायु में टहलने या दौड़ने जाएँ ।

 

# 12. पेट में कब्ज न होने दें , बिना भूख कुछ न खाएँ , हर ग्रास को दाँतों से खूब बारीक पीसकर तब निगलें ।

# 13. भोजन सादा , सात्त्विक , हलका और पौष्टिक होना चाहिए । बाजारू मिठाई या चाट – पकौड़ी न खाएँ ।

# 14. तंबाकू , भाँग , शराब आदि मादक द्रव्यों को सद्बुद्धि का शत्रु समझते हुए उनका कदापि सेवन न करें ।

# 15. नित्य नियमपूर्वक व्यायाम और प्राणायाम अवश्य करें ।

# 16. शरीर , वस्त्र , मकान , पुस्तकें , मेज – कुर्सी आदि की सफाई पर पूरा ध्यान रखें , गंदगी को पास भी न फटकने दें । स्वच्छता , सुंदरता मन को प्रसन्नता प्रदान करती है ।

# 17. अपनी योग्यता , क्षमता एवं शक्ति पर विश्वास रखें , अपने को तुच्छ , नाचीज , मूर्ख या अयोग्य कदापि न समझें ।

# 18. हर समय किसी न किसी काम में लगे रहें , बेकार न बैठे । मुस्कराहट और मन में प्रसन्नता रहे ।

# 19. द्वेष , दुराचार , छल , चोरी , क्रोध , कलह आदि मानसिक चोरों को अपने मस्तिष्क में न घुसने दें ।

# 20. नित्य ईश्वर की प्रार्थना करें कि वह आपको सद्गुण और सद्बुद्धि प्रदान करें । जो कुछ मिला है , उसके लिए ईश्वर का धन्यवाद करें । ईश्वर से कोई शिकायत न करें ।

# 21. गायत्री मंत्र का मौन मानसिक जप बुद्धि को बढ़ाता है ।

# 22. सदा सफल व्यक्तियों का सत्संग करें ।

#23. आयुर्वेद में बुद्धिवर्द्धक और बुद्धिनाशक पदार्थों का विवेचन किया है ।

( 1 ) ज्योतिष्मती , ( 2 ) ब्राह्मी , ( 3 ) शंखपुष्पी , ( 4 ) मीठी बच ( 5 ) अश्वगंधा , यह औषधियाँ बुद्धिवर्द्धक हैं । इनका चूर्ण सम मात्रा में मिलाकर प्रातः – सायं जल , दूध अथवा शहद के साथ प्रयोग करते हैं । खाद्य पदार्थों में अनार , बथुआ का शाक , जौ , सेंधा नमक , गाय का दूध , गाय का घी , मालकाँगिनी , बैंगन , बादाम तथा अखरोट बुद्धिवर्द्धक हैं । गाय का घी रात्रि सोने से पहले नाक में डालें । इससे मस्तिष्क को अधिक प्राणवायु प्राप्त होती है और मस्तिष्क को अधिक ऊर्जा मिलने से उसकी सक्रियता बढ़ती है ।

 

 ब्रह्मचर्य क्यों आवश्यक ?

 ‘ ब्रह्मचर्य’का अर्थ है – संयम और सदाचार द्वारा उत्कृष्टता की ओर मन , वचन और कर्म से अग्रसर होना । ब्रह्मचर्य का दूसरा अर्थ है , जननेंद्रिय का संयम । वस्तुत : ब्रह्मचर्य एक प्रकार का व्रत और तप है । ब्रह्मचर्य सबसे श्रेष्ठ तपश्चर्या है । ब्रह्मचर्य से बुद्धि प्रखर होती है , इंद्रियों की उछल – कूद बंद होती है , स्मरण शक्ति तीव्र होती है , मनन शक्ति का विकास होता है , चित्त में एकाग्रता आती है , आत्मिक बल बढ़ता है , आत्मनिर्भरता , निर्भीकता और साहसिकता जैसे गुण स्वत : जाग्रत होने लगते हैं । विद्यार्थी जीवन से ही ब्रह्मचर्य पालन से शरीर दृढ़ , मन पवित्र और आत्मा निर्मल होती चली जाती हैं , तेज बढ़ता है , उत्साह में वृद्धि होती है । ही आश्रित हैं ।

स्वास्थ्य , आयु , तेज , विद्या एवं शक्ति – सामर्थ्य सब ब्रह्मचर्य पर ही आश्रित हैं।

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