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How to sleep fast

How to sleep fast: अनिद्रा को प्रायः मनः जनित कि रोग समझा जाता है । यह सत्य है अधिकांश मामलों में इसका कारण वा भी मानसिक ही होता है , पर सदा यह मानसिक अव्यवस्था को ही दर्शाती है , ऐसा नहीं कहा जा सकता । कई बार इसके पीछे कई ऐसे सामान्य कारक जिम्मेदार होते हैं , जो अनिद्रा जैसी स्थिति पैदा कर देते हैं , यथा सोते समय हाथ – पैर न धोना , बिछावन का गंदा होना , पलंग की वस्तु , सोने की दिशा एवं पृथ्वी का भू है चुम्बकीय क्षेत्र आदि भी नींद नहीं आने के निमित्त कारण हो सकते हैं ।

How to sleep fast:आज विज्ञान का युग है । औद्योगिक एवं विभिन्न प्रकार के परिष्कृत यंत्र – उपकरणों के निर्माण क्षेत्र में इसने जितनी प्रगति की है , उसी अनुपात में भौतिक सम्पन्नता भी बढ़ाई है , विभिन्न प्रकार के सुविधा साधन भी जुटाये हैं । यहाँ तक कि लोगों ने ओढ़ने – बिछाने तक के कपड़ों में भी कृत्रिमता का जाल बुन रखा है । शरीर को कड़ाई और कठिनाई से बचाने के लिए रजाइयों है में ऊँचे स्तर की रुई भरी जाती है , पर ओढ़ने वाले इस तथ्य से सदैव अनभिज्ञ ही बने रहते हैं कि सिंथेटिक कपास के तकिये और रजाई एलर्जी के रूप में प्रकट होकर लोगों को , चैन से नहीं सोने देते । इस संबंध में एक जर्मन कहावत बड़ी लोकप्रिय बन चुकी है ” अच्छा तकिया अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक है ।

” नारमन पुस्तक में संगीत ध्वनियुक्त तकिये का उल्लेख मिलता है । स्त्री पुरुष के सिर की भार – भिन्नता को ध्यान में रखते हुये इनका निर्माण किया गया है । जो गहरी नींद आने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं । कहीं कहीं तो चुम्बकीय चिकित्सा प्रणाली का समावेश भी तकिये में देखने को मिला है । लंदन के बैल एण्ड क्रायडन डिपार्टमेंटल स्टोर में ‘ स्लंबर एड पिलो ‘ इसी आवश्यकता की पूर्ति करते हैं । फोम के बीच में महीन और अस्थिर चुम्बक संलग्न रहने के कारण मष्तिक में सूक्ष्म तरंगों का संचार हो उठता है , जिससे मानसिक होकर नींद आसानी से आ जाती है ।

पलंग के पाये रबर अथवा शीशे के न बनाये जायँ । रोगपचार संबंधी क्लीनिकों की जन्मदात्री मेरी स्टोप के अनुसार पृथ्वी से प्रवाहित विद्युत स्पंदन का संबंध शरीर से अवश्य जुड़ा रहना चाहिए । स्वास्थ्य रक्षा के लिए उनने भूमि शयन की परम्परा को पुनर्जीवित करने पर बल दिया है।

How to sleep fast:शास्त्रों में सोते समय की उपयुक्त – अनुपयुक्त दिशाओं का वर्णन है । दिशाओं का निर्धारण व्यक्ति की मनोदशा को पूरी तरह प्रभावित करके छोड़ता है । शयन कक्ष पलंग की स्थिति भी तदनुरूप रखनी चाहिए । सुप्रसिद्ध उपान्यासकार चार्ल्स डिकेंस तो सोते समय दिग्सूचक यंत्र को जेब में रख लिया करते थे । न मेरी स्टोप ने ‘ नींद ‘ नामक एक पुस्तक लिखी है , जिसमें पलंग के सिर वाला भाग उत्तर या दक्षिण में होने पर बल दिया है । परन्तु यह स्थिति योग साधना में निरत रहने वालों के लिए ही उपयुक्त बैठती है , क्योंकि पर्यावरणीय तनाव क्षेत्र को को सहन करने की सामर्थ्य सामान्य लोगों की अपेक्षा योगी संयमी लोगों में अधिक होती है ।

How to sleep fast:चिकित्सा शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार सामान्य स्तर के व्यक्ति को उत्तर – दक्षिण की दिशा में सिरहाना का नहीं रखना चाहिए । उनके स्वास्थ्य में के लिए तो पूर्व दिशा की ओर सिर करके सोना ही अनुकूल पड़ता है । मद्रास के वी . एच . एस . मेडिकल सेंटर के अनुसंधान कर्ताओं के र कथनानुसार उत्तर की दिशा में सिराहना रखने से परिधीय रक्त प्रवाह में अप्रत्याशित कमी आती देखी गयी है , जिससे स्वभाव में चिड़चिड़ापन तथा भ्रमग्रस्तता और तनाव की स्थिति उत्पन्न होने लगती है ।

परीक्षणो परान्त उनने पाया कि जो व्यक्ति पूर्व दिशा को सिर करके सोये उनके परिधीय रक्त प्रवाह में आश्चर्यजनक अभिवद्धि होने लगी। कहने का तात्पर्य है कि पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का प्राणिजगत पर पूरा पड़ता है । उत्तर दिशा में यदि सिर रहेगा , तो मस्तिष्क के विद्युत्तीय क्रियाकलाप में विशेष अड़चन एवं अवरोध खड़ा होता है । जबकि पूर्व में सिर करके सोने से यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती इस दशा में मस्तिष्क के विद्युतीय क्रियाकलाप तीव्र हो जाते हैं । इतना ही नहीं , अब इस चुम्बकीय क्षेत्र के प्रभाव से आमवात , गठिया और मिर्गी रोग के उपचार में भी सफलता मिल रही है ।

अतः सोने से पूर्व यदि सामान्य लगने वाले इन तथ्यों पर ध्यान दिया जा सके , तो व्यक्ति अनिद्रा जैसी दु : खदायी स्थिति से बच सकता है।

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